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Thursday, September 18, 2014

ग़ज़ल- मुझे उसको बताना है- अबूज़ैद अंसारी

मुहब्बत में जो हारा है 
ग़मों से ख़ूब मारा है 
वो जो ज़िंदा है मर मर के 
उसे जीना सिखाना है 
मुझे उसको बताना है 
कहाँ उसका ठिकाना है 

बहुत से राज़ थे दिल में 
जो दिल में दफ़्न कर डाले 
मिली एक हार ने दिल पर 
 हैं कितने ज़ख्म कर डाले 
उसे जिसने हराया था 
मुझे उसको हराना है 

मुझे उसको बताना है 
कहाँ उसका ठिकाना है 

अभी मैं क्या लिखूंगा इन 
मुहब्बत के फ़सानों को 
ग़मों के दर्द के दिल के 
बे-मतलब टूट जाने को 

अभी मैं बुन रहा हूँ लफ्ज़ 
मुझे क़िस्सा बनाना है 
कहानी जो अधूरी है 
उसे पूरी बनाना है 
मुझे उसको बताना है 
कहाँ उसका ठिकाना है 

 
अबूज़ैद अंसारी जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नयी दिल्ली में बारहवीं कक्षा के छात्र हैं. आप जीवन मैग के सह-संपादक हैं और नवाबों के शहर लखनऊ से ताल्लुक़ रखते हैं.


Tuesday, September 09, 2014

दिल बनारसिया-2- रामनगर की रामलीला- अमिनेष

"दिल बनारसिया" श्रृंखला कि अगली कड़ी में- "रामनगर की रामलीला"

"कइसन घरनी ,केकर घर नेमी चललन रामनगर.."
उक्त पंक्ति बनारसी लहजे की एक नुमाइंदगी भर है जो रामलीला की महत्ता को दर्शाती हैं ...बनारस का दिल लंका मे बसता है...लंका वो जगह है जहाँ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का सिंहद्वार स्थित है और जहाँ से एक रास्ता गंगा पार रामनगर की हवेली को जाता है। मैंने ताकीद की आख़िर इस जगह को लंका क्यूँ कहा जाता है? यह नाम काशी की उस परंपरा की देन है जिसमें गंगा पार रामनगर को अयोध्या तथा गंगा इस पार इस जगह को रावण की लंका मानकर एक खुले विशाल थियटर के रूप मे प्रयुक्त कर काशी नरेश हर शारदीय नवरात्र के उपलक्ष्य मे रामलीला का आयोजन करवाते थे। वक्त के साथ यह महत्वाकांक्षी आयोजन सिर्फ रामनगर तक ही सिमट गया और लंका नाम लोगो के जेहन मे बस गया। 
 
(अमिनेष आर्यन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में राजनीतिशास्त्र स्नातक‍ प्रथम वर्ष के छात्र हैं। अमिनेष मूलरूप से बिहार के हाजीपुर से सम्बन्ध रखते हैं और जीवन मैग की संपादन समिति के सदस्य हैं।)
Facebook: www.facebook.com/aminesh.aryan




Friday, September 05, 2014

शिक्षक दिवस पर नन्दलाल‬ का संबोधन

शिक्षक दिवस पर एक छात्र नन्दलाल‬ का संबोधन :-

प्रिय पाठकों, आप सब को शिक्षक दिवस ही हार्दिक शुभकामनाएं.
मित्रों, मैं अपनी बात शुरू करने के पूर्व विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में अहर्निश सेवारत परम-आदरणीय विशाल शिक्षक वर्ग को प्रणाम करता हूँ.
जैसा कि हम सभी जानते हैं, वर्ष 1962 से प्रतिवर्ष महान शिक्षक और दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस 5 सितंबर का दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. हमारे यहाँ शिक्षक दिवस मनाने की परम्परा कोई नई चीज़ नहीं है. सदियों से हम हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते आ रहे हैं. हम जिस महान भारत वर्ष के वासी हैं उसकी संस्कृति का एक अहम और पवित्र हिस्सा है- गुरु शिष्य परंपरा. इस परम्परा को निरंतर कायम रखने के उद्देश्य से और समाज निर्माण में शिक्षकों की भूमिका के सम्मान में यह दिवस मनाया जाता है.
डॉ. राधाकृष्णन भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति रहे. वह भारतीय संस्कृति के उद्भट विद्वान, एक महान शिक्षाविद, प्रख्यात दार्शनिक, लोकप्रिय वक्ता होने के साथ-साथ विश्वविख्यात हिन्दू विचारक थे. डॉक्टर राधाकृष्णन ने अपने जीवन के 40 वर्ष एक शिक्षक के रूप में व्यतीत किए थे. वह एक आदर्श शिक्षक थे. पूरी दुनिया में उन्हें अलौकिक सम्मान प्राप्त था.
मुझे एक दृष्टांत याद आ रहा है. यह उस समय की बात है जब राधाकृष्णन सोवियत संघ में भारत के राजदूत थे. वे स्टालिन से मिलने उनके आवास पहुंचे तो स्टालिन अपने उच्चासन से उतर उन्हें अपने आसन पर बैठाने लगा. राधाकृष्णन के आश्चर्य प्रकट करने पर वह कहने लगा- “इस समय न आप भारत के राजदूत हैं न मैं सोवियत का प्रधान, आप तो विश्व-गुरु हैं, श्रेष्ठ हैं और परम-आदरणीय भी. यह आसन आपको ही शोभा देगी.” स्टालिन के हृदय में 'फिलास्फर-अध्यापक-राजदूत' के प्रति गहरा सम्मान था. ऐसे ही जब वे सोवियत से विदा होने लगे तो तब स्टालिन ने कहा था- “आप पहले व्यक्ति हो, जिसने मेरे साथ एक इंसान के रूप में व्यवहार किया हैं और मुझे अमानव अथवा दैत्य नहीं समझा है। आपके जाने से मैं दुख का अनुभव कर रहा हूँ. मैं चाहता हूँ कि आप दीर्घायु हो. मैं ज़्यादा नहीं जीना चाहता हूँ.” इस समय स्टालिन की आँखों में नमी थी. फिर छह माह बाद ही स्टालिन की मृत्यु हो गई. साथियों, हमारे शास्त्र कहते हैं- राजा की पूजा सिर्फ उसके राज्य में होती है किन्तु विद्वान और गुरुजन समस्त लोकों में पूजे जाते हैं.
हमारा दर्शन है-
गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात परब्रह्म तस्मैः श्री गुरुवेः नमः।।
अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश तथा साक्षात् ईश्वर समान गुरु को मेरा प्रणाम. हमारी संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी बड़ा माना गया है. भगवान राम और कृष्ण ने स्वयं गुरु की अपार सेवा की.
कबीर कहते हैं –
गुरु गोविन्द दोउ खड़े काके लागु पाँव ।
बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दियो मिलाय ।।
गुरु मनुष्य रूप में नारायण ही हैं. गुरु का अर्थ ही है विराट. जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए उसे ही गुरु कहा गया है. हिन्दू संस्कृति में गुरु के बिना ज्ञान अधूरा माना गया है. गुरु की सेवा से ज्ञान, ज्ञान से मोक्ष और मोक्ष में परमानंद की प्राप्ति होती है. अतः गुरु को जीवन रूपी भवसागर का खेवनहार कहा गया है. गुरु-शिष्य के श्रेष्ठतम संबंध में प्रेम के सभी रूपों प्यार, स्नेह, श्रद्धा, मित्रता और भक्ति की अभिव्यक्ति होती है. भला गुरु निजामुद्दीन औलिया और शिष्य अमीर खुसरो के प्रेम को भला कौन भूल सकता है. उस्ताद के महा निर्वाण पर शागिर्द ने कहा -
गोरी सोवे सेज पर मुख पर डारे केस।
चल खुसरो घर आपने सांझ भई चहुं देस।।
और अपने प्राण भी त्याग दिए. गुरु शिष्य के चरम प्रेम में स्वार्थ का कहीं स्थान ही नहीं. वहां समर्पण होता है. एकलव्य ने गुरु द्रोण को अंगूठा दान दे दिया था. ऐसे ही एक बार सिकंदर अपने गुरु अरस्तु के साथ कहीं जा रहे थे. रास्ते में एक संकरी किन्तु तेज नदी बह रही थी. अरस्तु के लाख मन करने पर भी वह उन्हें आगे न जाने देकर नदी में स्वयं आगे चला ताकि वह डूब भी जाये तो उसके गुरु बच जायेंगे और उसके जैसे और भी योग्य शिष्य गढ़ लेंगे.
एक वैज्ञानिक एक यंत्र बनाता है, एक अभियंता भवन, पुल, मशीन और कंप्यूटर बनाता है , ऐसे ही एक कलाकार अपनी कृति रचता है किन्तु एक शिक्षक एक इंसान गढ़ता है जो अलग-अलग दायित्वों में बाकी का सारा संसार गढ़ता है. सुकरात के पिता शिल्पकार थे और माता दाई. वह दोनों बनना चाहते थे लिहाजा अध्यापक बन गए ताकि वह अपने शिष्य को इस दुनियादारी में प्रवेश करा सकें और उनमें एक उत्तम नागरिक भी गढ़ सकें. प्रत्येक सफल व्यक्ति के पीछे किसी गुरु की कड़ी मेहनत व प्रेरणा होती है. मानव समाज में उनका स्थान सर्वोपरि और सदैव पूजनीय है. अब्राहम लिंकन द्वारा अपने पुत्र के शिक्षक को लिख पत्र को भला कौन भूल सकता है.
मित्रों, हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी कहते हैं- क्या आपने कभी सोचा है कि भिक्षुक हमेशा मंदिर के बाहर ही क्यों खड़े रहते हैं, किसी सिनेमा हॉल या फाइव-स्टार होटल के बाहर क्यों नहीं? क्योंकि वे जानते हैं कि जो लोग मंदिर में पूजा करने को आते हैं, वे उनके साथ दयापूर्ण व्यवहार करेंगे. ठीक इसी तरह भारत के भविष्य को लेकर जब मेरे मन में विचार कौंधता है तब मैं एक भिक्षुक की भांति शिक्षक समुदाय के द्वार पर खड़ा हो जाता हूं. शिक्षक ज्ञान का मंदिर होता है और ज्ञानदान की अपार क्षमता उसमें होती है. शिक्षक ही भारत के उज्ज्वल भविष्य का आधार हैं.
किन्तु यह अत्यंत दुखद है कि आज आधुनिकता की सह में बदलते समाज में शिक्षकों का भी नैतिक अवमूल्यन हुआ है. वे मानवीय कम और व्यावसायिक अधिक हो गए हैं. शिक्षा तो पूर्णतः व्यवसाय बन चुकी है तथापि आज भी शिक्षकों में ही सर्वाधिक समाज-हित-चिंतन शेष है. यदि एक शिक्षक अपने शिष्य को डांटता या पीटता भी है तो इसमें शिष्य का भला और उसके प्रति गुरु का स्नेह ही छिपा होता है. इसलिए यह दिन सिर्फ शिक्षकों को सम्मानित करने का ही दिन नहीं है, यह उन्हें उनकी महान परंपरा और कर्तव्यों को स्मरण कराने का भी दिन है. उन्हें यह याद दिलाने का दिन है कि वही एक सामाजिक रूप से स्वस्थ समाज के निर्माता और पोषक हैं.
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम कहते हैं कि यदि सभी माता पिता और शिक्षक अपने-अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें तभी भारत से भ्रष्टाचार सहित तमाम बुराइयों का समूल विनाश संभव हो सकेगा. हमें उनके कथन को अपने जीवन आचरण में ग्रहण करने से कोई गुरेज नहीं होना चाहिए.
अतः, हे ! इस पवित्र भूमि के वर्तमान और भविष्य के महान माताओं, पिताओं और शिक्षकों ! आपसे मेरा विनम्र निवेदन है कि आप सब कलाम जी की कही इन बातों का अनुकरण करें. अपना-अपना काम ईमानदारी और सच्ची निष्ठा से करें. इससे हम सब का भला होगा. यकीन मानिए शीघ्र ही भारत पुनः जगत-गुरु के आसन पर विराजमान होगा.
अंत में पुनः इस पावन अवसर पर सभी साथियों को शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाइयाँ और देश विदेश के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को मेरा सादर प्रणाम !
धन्यवाद !

आपका सह्रदय
--नंदलाल मिश्रा
प्रबंध संपादक
जीवन मग

Thursday, September 04, 2014

लालूजी(कार्टून)- विख्यात बड़बड़िया



जीवन मैग अंक ६ से उद्धृत

Wednesday, September 03, 2014

Club Activities June-July 2014


From Jeevan Mag 6

जम कर बरसो प्यारे बादल- अबूज़ैद अंसारी

कलियाँ फ़ूटे फले फसल 
ख़ुशी से किसान चलायें हल
तुम बरसाओ ऐसा जल 
ना बहे किसी का करुणा जल 
चिड़िया फिर चहचहाने लगें 
कलियाँ फिर लहलहाने लगें 
हर ओर शांति हो हर पल 
जान कर हर कोई जाए मचल 
आने वाला सुखद है कल 
जम कर बरसो प्यारे बादल 
तुम हो कितने न्यारे बादल

अबूज़ैद अंसारी जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नयी दिल्ली में बारहवीं कक्षा के छात्र हैं. आप जीवन मैग के सह-संपादक हैं और नवाबों के शहर लखनऊ से ताल्लुक़ रखते हैं.

Tuesday, September 02, 2014

ग़ज़ल- कुछ राज़ जो मेरे दिल में हैं- अबूज़ैद अंसारी

कुछ राज़ जो मेरे दिल में हैं
दिल में ही दफ़न हो जाएंगे 
कोई बात जो उनसे थी कहनी 
अल्फ़ाज़ नहीं बन पाएंगे 
उस रात बहुत मैं रोया था 
जब नज़रें उन्होने फेरीं थी 
उम्मीद नहीं थी उनसे ये 
वो ऐसे मुझे ठुकराएंगे 

इज़हार-ए-मुहब्बत करने को 
वो मेरी खता क्यों मान रहे 
वो हाथ मेरा ग़र थामेंगे 
हम दूर, बहुत दूर जाएंगे 

मैं रेत के उभरे टीलों सा 
वो तेज़ हवाओं का झोंका 
वो पास मेरे जब गुज़रेगा 
हम कुछ तो बिखर से जाएंगे 

कुछ राज़ जो मेरे दिल में हैं
दिल में ही दफ़न हो जाएंगे 
कोई बात जो उनसे थी कहनी 
अल्फ़ाज़ नहीं बन पाएंगे 

कहीं भी मैं चला जाऊं 
या कश्ती में या वीरां में 
शब होगी जहाँ मेरी 
वो मुझको याद आएंगे 
अबूज़ैद अंसारी जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नयी दिल्ली में बारहवीं कक्षा के छात्र हैं. आप जीवन मैग के सह-संपादक हैं और नवाबों के शहर लखनऊ से ताल्लुक़ रखते हैं.

Sunday, August 31, 2014

Photos of the Month- June-July 2014

 Jeevan Mag 6
Photo Credits-

1) Snowman- Umair Altaf Padder, Kulgam, Jammu & Kashmir 
Class XII Commerce, Jamia Millia Islamia, New Delhi

2) Mountain Landscape- Karan Negi, Shimla (Himachal Pradesh)

3) Manual artwork by kids-  Abha Ojha, Jaipur (Rajasthan)

4) Akash Kumar- Mallik Altaf, Srinagar (Jammu & Kashmir)
Class XII Arts, Jamia Millia Islamia, New Delhi

5) Rain in Indian Plains- Akash Kumar, Motihari (Bihar) Editor-in- Chief, JeevanMag.com

6) Wildlife- Chaitanyaa Sharma, Jaipur (Rajasthan)

नज़्म- अबुज़ैद अंसारी

अभी तू रुक गया है क्यों
तुझे तो दूर जाना है 

जहाँ कोई नहीं पहुँचा
वहाँ तेरा ठिकाना है 
अभी ना हार हिम्मत तू 
तू फिर से चल रुख-ए-मंज़िल 

सफ़र काँटों भरा है 
इन पे तुझको चल के जाना है 
तेरा मेयार औरों से तो 
ज़्यादा है नहीं लेकिन 

बिना पंखों के फिर भी 
आसमां छू कर दिखाना है 
अबूज़ैद अंसारी जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नयी दिल्ली में बारहवीं कक्षा के छात्र हैं. आप जीवन मैग के सह-संपादक हैं और नवाबों के शहर लखनऊ से ताल्लुक़ रखते हैं.


Tuesday, August 26, 2014

बतकही

बातों ही बातों में जो बात, बात बनते बनते बात बनकर बात बन जाती है उस बात के पीछे भी कोई बात हो अथवा ना हो किंतु परन्तु  के  संदर्भ में उस बात को बात बनाकर बातों ही बातों में उड़ा देना भी एक बात है. इसका मतलब ये हुआ कि हरेक बात बात बनें या ना बनें लेकिन बातों ही बातों में बात बनकर उड़ जाने के तत्पश्चात उस बात का निरूपण इस बात के साथ किया जाना चाहिए कि बात फिर से किसी बात को लेकर बातों ही बातों में बात ना बन जाए. इक बात मैं भी आपको बता दूँ कि जो बात मैं बाताऊँगा उस बात का सम्बन्ध भी किसी बात से होना उतना ही लाजमी है जितना कि इस बात का सम्बन्ध उस बात से. अब ये भी सत्य है कि जब वो बात भी किसी ना किसी बात से ही उभरी हुई है तो क्यूँ ना उस बात को भी इस बात के साथ बातों ही बातों में बात बनाकर उड़ा दिया जाए. खैर . . . मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ है . . . और दूसरे लफ़्जो में ये भी इक बात ही है.  


 कुमार शिवम् मिश्रा जीवन मैग की संपादन समिति के सदस्य हैं. आप कॉमर्स कॉलेज, पटना में अंग्रेजी स्नातक (द्वितीय वर्ष) के छात्र हैं.

Uncle Tichkoo 1

Uncle Tichkoo is a wise old man but lately with age, he appears to suffer from Amnesia. He has lost the grasping power but is never short of wise advice at the right time. He is clever and sometimes it appears that he is faking his amnesia. Tichkoo comprises of 2 words (Tich=slightly and Koo=cool). This character is a creation of Divya Suri who is a student of class 5th of Queen’s Valley School. From now on; Jeevan Mag will publish cartoon strips of Uncle Tichkoo in every issue.  © Divya Suri www.tichkoo.com
Following strips are from Jeevan Mag 6 (June-July 2014)






Monday, August 25, 2014

Debate: Israel-Palestine conflict: Parvez Alam & Aminesh Aryan

The Big Debate: Israel-Palestine conflict

In the name of self-defense     
                                   -Parvez Alam


On 12th June 2014, Israel accused Hamas of kidnapping 3 Israeli teens in Gush Etzion, west bank of Gaza. In return they arrested 530 Palestinian citizens. Israel launched a heavy air-strike on Gaza in the name of 'Defending itself' and then their blood-thirsty troops entered Palestinian land murdering everyone they get in the way. They call it self-defense. They defended themselves by murdering 2000 civilians including 500+ children till now. What an appreciable self-defense it is? They're accusing Hamas of killing their 'innocent civilians ' who're living on looted lands of Palestine since 1948. Was the burning of thousand villages then a pre-act of self-defense? Because Hamas wasn't even in existence back then. Maybe possible. And talking about ruthless killing perhaps butchering of people on streets, in hospitals, in mosques, ambulances etc. is not new for the people of Palestine. They've to be ready for the worst every morning they wake up.

The world esp. the western nations have funded Israel in their bloody act of killing innocents following the theory of Zionism which is itself discarded by most of Jews. And after every such massacre of thousands of Palestinians they say they're willing to set up truce, truce on what price?                                                                       


Palestinians don't want truce, they want their land back, they want to live in their country without any fear of getting slaughtered any minute, and they want to see their kids grow playing instead of getting bombed in the schools, playgrounds, beaches. Can anyone answer why Palestine is not allowed to keep an army of itself like any other country? And that's the reason they're fighting.That's the reason Hamas is fighting. That's the reason PFLP (People's Front for Liberation of Palestine) & Maoist party of Palestine is fighting.They're not terrorists as branded by west controlled media but they're freedom fighters for their citizens. They're fighting for the liberation and freedom of their land, which belongs to them only. They may not have as heavy artillery as Israel but they'll win because people's resistance can never be defeated.What could be a better example of this than Vietnam?                                                                


The world's 'SUPERPOWERS' maybe supporting Israel but people aren't. The world has never seen so many protests across the globe in recent times. Many celebrities like Ronaldo, Mesut ozïl, Al puccino, John Berger, Nobel laureate Tutu and many to add on the list are standing for the truth, for the freedom of Palestine.


The BDS movement has started to show its effects. According to reports, Israel's economy has lost 950 million dollars in last 2 months. But there's still a long way to go, we need to continue the boycott and Palestine needs to keep their resistance going. They'll win, sooner or late. Because they have nothing to lose now and a message to all the martyrs, "your sacrifice will never be wasted; the day is near when your future generation will breathe freely ".       

And for all the supporters of Israel ,
America's intellectual Noam Chomsky's words seems perfect , " People who call themselves supporters of Israel are actually supporters of its moral degeneration and ultimate destruction." 


One of my Palestinian friend said , " First they said , Palestinian fight like heroes , now they'll say , heroes fight like Palestinians. " 



(Parvez Alam is a student of Class XII Science at Jamia Millia Islamia, New Delhi. Basically from Chhapra in Bihar, Parvez subscribes to communist ideology.) 
Facebook: www.facebook.com/parvez16mb




आतंक के विरुद्ध इज़रायल की मुहिम
                                     

 -अमिनेष आर्यन


इज़रायल दुनिया का एकमात्र यहूदी राष्ट्र है, ये वो यहूदी हैं जो सदियों दुनिया द्वारा सताये जाते रहे हैँ। पूर्व मेँ इनके पवित्र मंदिर दो बार रोमन साम्राज्य द्वारा ध्वस्त कर दिए गए और इनपर असभ्य होने का आरोप लगा, ईसाई इन्हेँ नीच मानते थे और इस तरह यहूदियों को यूरोप से निकाल दिया गया। मध्य काल मे अरब प्रायद्वीप मेँ इस्लाम के साथ संघर्ष ने यहूदियों को अपने ख़ुद के राष्ट्र के लिए सोचने को मज़बूर कर दिया। कालांतर मे हिटलर के नाज़ीवाद ने किस तरह यहूदियों का कत्लेआम किया , जिसे दुनिया आज महाविध्वंस के नाम से जानती हैँ। यहूदियों के मातृ स्थान उनसे छीन लिए गए और उन्हेँ दर-दर भटकने के लिए मज़बूर किया गया। वक़्त के साथ यहूदियों ने भारत, अमेरिका जैसे नवसृजित देशों मेँ शरण ली। महान साइंटिस्ट अल्बर्ट आइंस्टाइन भी उनमें से एक थे जो हिटलर की नज़रों से बच कर अमेरिका चले गए। जेरुसलम को यहूदी अपना घर मानते हैँ, यहीँ पर उनका वो पवित्र मंदिर था। यह स्थान इस्लाम के लिए भी पवित्र है पैगंबर हजरत मोहम्मद यहीँ से स्वर्ग की यात्रा पर गए थे और संयोगवश ईसा मसीह का जन्म भी यहीँ हुआ इसलिए यह ईसाईयत का भी पवित्र स्थान हैँ। दोनों ही धर्म संसार के विभिन्न क्षेत्रोँ मे प्रसारित और प्रतिष्ठित भी हैँ जबकि यहूदियों को अपने देश के लिए सदियोँ लड़ना पड़ा तीन धर्मयुद्ध हुए और इस तरह जेरुसलम धर्मो का रणक्षेत्र बन गया। अंत में वर्ष 1948 में इज़रायल के नाम से एक अलग यहूदी राष्ट्र की घोषणा की गई और जेरुसलम इज़रायल राष्ट्र की राजधानी बनी। वक़्त के साथ इज़रायल ने समृद्धि-संपन्नता-विकास-प्रतिष्ठा-शक्ति हासिल कि और मध्य-पूर्व एशिया का शक्तिशाली देश बन कर उभरा। यहाँ तक कि वो युद्ध हथियारों के सबसे बड़े निर्यातकों में से है। आज जब आतंकी हमले के ख़िलाफ उसने कारवाई शुरू कि तो दो-दो विश्वयुद्ध लड़ चुके देश मानवता कि दुहाई दे रहे है? क्या अपनी आत्मरक्षा करना गलत हैँ? अपनी गजब की रक्षात्मक प्रणाली से दुश्मन के हमलोँ को नाकाम कर अगर वो अपने नागरिकों की रक्षा कर सकने में सक्षम है तो क्या वो गलत है? या फिर वो इसलिए गलत हैँ कि इज़रायली नागरिक इस युद्ध मे हताहत नहीँ हो रहे? हमास-इज़रायल युद्ध कोई आपसी रंजिश नहीँ बल्कि उस परंपरा की बानगी है जिसमेँ धर्म को राष्ट्र का आधार माना जाता हैँ और उस राजनीतिक साजिश की देन जिसमेँ इज़रायल से अलग एक फिलिस्तीनी राज्य की घोषणा की गई। ताज्जुब की बात देखिए संयुक्त राष्ट्र जैसे भारी-भरकम जमघट ने जेरूसलम को ही फिलिस्तीन कि राजधानी स्वीकार किया जो इज़रायल की अधिकारिक राजधानी हैँ। आख़िर क्यूँ? तब तो ऐसा लगता है जैसे यह युद्ध उपहार स्वरूप दिया गया हो । दुनिया बखूबी जानती हैँ कि गाजा पट्टी के क्या हालात हैँ गाजा पट्टी पर नियंत्रण रखने वाली हमास ने एक अलग इस्लामिक स्टेट के नाम पर  जो आतंक फैला रखा है वो उस इलाके कि बदकिस्मती है कि उसकी अपनी ही निर्वाचित सरकार उनका विकास नहीँ चाहती, इज़रायल पर बार-बार हमले कर हमास ने यह साबित किया है कि पवित्र इस्लाम के नाम पर तुच्छ लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए पूरे फिलिस्तीनी राज्य को युद्ध मेँ झोँकना चाहते है। यह उसी तरह है जैसे अफगानिस्तान मे तालिबान और गुलाम कश्मीर के अलगाववादी आतँकी। इसलिए इज़रायल आतंक के ख़िलाफ युद्ध कर रहा हैँ ना कि फिलिस्तीन के खिलाफ। इस बात का यह सबूत है की उसी फिलिस्तीन के वेस्ट बैँक इलाके जो हमास के शासन से मुक्त हैं और जहाँ शान्ति छाई है। भारत- इज़रायल संबंध भारत को रक्षा क्षेत्र मे सक्षम बनाती हैँ। ऐसे मे काँग्रेस चाहती है कि हम इज़रायल का विरोध करें जबकि उसी की सरकार में इज़रायल के साथ कई अहम रक्षा समझौते हुए। हमारी अंतर्राष्ट्रीय  नीति भले ही शांतिमूलक हो लेकिन भारत का इस मामले में तटस्थ बने रहना ही लाभदायक हैँ।

(अमिनेष आर्यन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में राजनीतिशास्त्र स्नातक‍ प्रथम वर्ष के छात्र हैं। मज़ेदार बात यह है कि मूल रुप से बिहार के हाजीपुर से संबंध रखने वाले अमिनेष भी कम्युनिस्ट विचारधारा में विश्वास रखते हैं। अमिनेष ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं रखते तथापि नास्तिक हैं।)

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